क्या कहता है भिवानी-महेंद्रगढ़ का सियासी समीकरण? इस बार कौन कितना दमदार?

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हरियाणा न्यूज: यूं तो हरियाणा की 10 सीटों पर सबकी नजर है लेकिन हरियाणा लोकसभा की कुछ ऐसी सीटें है। जहां से जीत के मायने और भी खास है। भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट का मिजाज फिलहाल बदला नजर आ रहा है। 2014 की मोदी लहर में भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चौधरी धर्मबीर सिंह ने बाजी मारी थी। ठीक 2014 लोकसभा चुनाव से पहले धर्मबीर सिंह ने दल ही बदल लिया था और कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए थे। 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस जीत की ताल ठोक रही है। कांग्रेस प्रत्याशी श्रुति चौधरी 2014 में हारी हुई बाजी पलटने में जुटी हैं।

भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा संख्या जाट मतदाताओं की है। यहां करीब 3,60,000 जाट वोटर्स हैं। तो वहीं दूसरी सबसे ज्यादा यादव (अहीर) वोटर्स की संख्या करीब 2,60,000 है और वहीं 1,34,000 ब्राह्मण वोटर्स हैं। 2008 से पहले भिवानी और महेंद्रगढ़ दो अलग-अलग लोकसभा सीटें थीं। लेकिन 2008 में हुए परीसिमन में कुछ इलाकों को काटकर अलग कर दिया गया। वहीं बाकी बचे इलाकों को मिलाकर एक नई सीट भिवानी-महेंद्रगढ़ का गठन किया। पहली बार 2009 के चुनावों में यह सीट वजूद में आई थी। पुरानी भिवानी सीट पर जनता पार्टी की चंद्रावती ने कांग्रेस के बंसीलाल को हराया था। इसके बाद 1980 और 1984 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के बंसीलाल ने लगातार जीत दर्ज की।

1999 में यहां से इनेलो के अजय चौटाला और 2004 में कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई ने बाजी मारी। भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर जीत की भूमिका जाट समाज, यादव और ब्राह्मणों ने निभाई। 2009 लोकसभा चुनाव कांग्रेस की झोली में आई लेकिन 2014 मोदी लहर के आगे कांग्रेस की झोली से ये सीट निकल गई और बीजेपी के चौ. धर्मबीर सिंह के पास आ गई। लेकिन इस बार समीकरण अलग है। बता दें कि धर्मबीर सिंह ने पहले चुनाव लड़ने से मना किया था पर बाद में टिकट उन्ही के खाते में आई लेकिन बावजूद इसके उन्हें फिर से टिकट मिली। कांग्रेस की श्रुति चौधरी जीत की ताल ठोक रही है। वहीं आप-जेजपी से स्वाति यादव  को रण में उतारा गया है। तो वहीं इनेलो से बलवान सिंह को टिकट मिला है।

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