सूख रही है हरियाणा की धरती, प्रदेश में गहरा रहा है भूजल स्तर का संकट

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हरियाणा न्यूज: हरियाणा में भूमिगत जल की स्थिति खतरे की घंटी को पार कर गई है। जल प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूमिगत जल की निकासी इसी प्रकार जारी रही तो खेतों की प्यास बुझना तो दूर हरियाणावासी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाएंगे। एक तरफ गिरते भू-जल स्तर की मार तो दूसरी तरफ सरकार से गुहार ये गुहार इन बच्चों की, महिलाओं की, ये कहें पूरे आवाम की जो पानी के मटकों से खुद को दूर नहीं कर पा रहे है। करें तो कैसे, पानी का कोई सानी भी तो नहीं कि काम चला लिया जाएं। गांवों में बने नलों के आगे मटकों की कतार और टैंकरों से पानी खरीदने की तो मानो अब परंपरा सी पड़ चुकी है।

प्रदेश में लगी कतारें किसी समारोह का हिस्सा नहीं बल्कि गिरते भू-जल स्तर से गहराया जल संकट है। जिसका खामियाजा प्रदेश के एक नहीं, दो नहीं, बल्कि हजारों गांव के लोग भुगत रहे है। बढ़ती गर्मी के इस दौर में घर-घर में पानी की कमी किसी नरक से कम नहीं। जब लोगों को जीने के लिए ही मशक्कत करनी पड़ जाएं कुदरत का कहर यहीं नहीं थमा कि इस बार की रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने ऐसा प्रचंड रुप दिखाया कि लोगों की जान पर बन आई है।  

यमुना और भाखड़ा से करीब 23 लाख एकड़ फीट पानी प्रदेश को मिल पाता है जबकि 120 लाख एकड़ फीट पानी की आपूर्ति 8 लाख 47 हजार 750 ट्यूबवेलों पर टिकी है। वहीं, 2 लाख 97 हजार डीजल पम्प और 5 लाख 50 हजार डीजल पम्प सेट भी लगे हैं। इस तरह प्रदेश में फिलहाल 57 लाख एकड़ फीट पानी की कमी है। पेयजल किल्लत के चलते प्रदेश के 6804 गांवों में से 4189 गांवों में प्रति व्यक्ति निर्धारित 70 लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा है। गर्मी ऊफान पर है तो ऐसे में भू-जल स्तर का गिरना तो वाजिब है। लेकिन पानी की बर्बादी करने से पानी के लिए तरस रहे ये लोग भी संकोच नहीं करते है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि लोगों को जागरुक करें  और खुद भी गिरते भू-जल स्तर पर ठोस कदम उठाएं।

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