प्रशासन के आदेशों की उड़ती धज्जियां, प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से किया जा रहा पॉलिथीन का प्रयोग

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हरियाणा न्यूज: राष्ट्रीय हरित न्यायालय (एनजीटी) और प्रदेश सरकार की ओर से पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाए जाने के बाद भी बाजारों में धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। पर्यावरण के लिए खतरा बन रही इन पॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े-बड़े शापिंग कॉप्लेक्सों में भी धड़ल्ले से पॉलिथीन बैग में सामान डालकर दिया जा रहा है।

पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और प्रदेश सरकार ने इसके उपयोग पर काफी समय पहले ही प्रतिबंध लगा रखा था, बावजूद इसके पॉलिथीन बैग के उपयोग पर कोई असर नहीं पड़ा। ठोस खाद्य पदार्थ ही नहीं, तरल पेय पदार्थ भी पॉलिथीन थैलियों में डालकर बेचे जा रहे हैं। यहां तक कि कई चायविक्रेता भी पॉलिथीन में पैक करके चाय पकड़ा देते हैं। यह अत्यंत हानिकारक होती है, लेकिन उपभोक्ता अपनी सुविधा को देखते हुए पॉलिथीन से स्वास्थ पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों की तरफ ध्यान नहीं देता।

स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जो व्यक्ति अधिकाधिक पॉलिथीन का इस्तेमाल करते हैं, उनको जानलेवा रोग कैंसर चपेट में ले सकता है। अगर गलती से भी पॉलिथीन का छोटे से भी छोटा टुकड़ा सांस की नली में चला जाए तो व्यक्ति की मौत तक हो सकती हैं। जगह-जगह कूड़े में पड़ी पॉलिथीन जहां कस्बे की सुंदरता पर दाग लगाती है, वहीं प्रकृति को भी नुकसान पहुंचता रही हैं। कस्बे के सार्वजनिक स्थानों पर पॉलिथीन पड़े हुए मिलते हैं। ये हवा के साथ उड़कर गलियों व सड़कों पर फैलकर गंदगी फैलाते रहते हैं।

आधुनिक युग में सुविधाओं के विस्तार ने सबसे अधिक पर्यावरण को ही चोट पहुंचाई है। लोगों की सुविधा के लिए ईजाद किया गया पॉलिथीन आज मानव जाति के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। सैकड़ों-हजारों सालों तक नष्ट नहीं होने के कारण यह भूमि की उर्वरा क्षमता को तो खत्म कर ही रहा है, भूजल को भी रिचार्ज होने में बाधक बन रहा है। पॉलिथीन को जलाने से निकले वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहा है जो ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण बन रहा है।

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