‘ऑपरेशन विजय’ के 20 साल पूरे…भारत की पाकिस्तान पर एक ऐसी विजय, जिसकी मिसाल आज भी है कायम

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हरियाणा न्यूज़: ‘आई लव माई इंडिया’… ये गाना सुनते ही हमारा सीना गर्व से फूल जाता है और आज हिंदुस्तान के लिए एक ऐसा ही गौरव का दिन है। आज से ठीक 20 साल पहले सरहद पर भारत ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ाते हुए घुसपैठियों को कारगिल की पहाड़ियों से वापसी का रास्ता दिखा दिया था। जुलाई 1999 में हिंदुस्तान के जवानों ने पाकिस्तान पर एक ऐसी फतह हासिल की थी, जिसकी मिसाल दुनिया आज भी देती है। इस ऐतिहासिक सफलता के 20 साल पूरे होने पर आज कारगिल की फिज़ाओं के साथ-साथ पूरे देश में एक बार फिर देशभक्ति का संगीत गूंज रहा है।

आज एक बार फिर शहीदों के लिए मेला लग रहा है, शहीदों के सम्मान में दूर-दूर से लोग द्रास के शहीद स्मारक पर पहुंचे हैं, जहां कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के बड़े नेताओं ने कारगिल दिवस के मौके पर शहीदों को नमन किया।

कारगिल का नाम सुनते ही जहां एक तरफ हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, तो वहीं दूसरी ओर हम सभी की आंखे उस दिन को याद कर नम भी हो जाती हैं। कारगिल की हवा में आज भी सिर्फ वीरता और शोर्य की ही महक है।

दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में करगिल युद्ध हुआ था। इस युद्ध की शुरुआत 1998 में ही हो गई थी, जब पाकिस्तान इस ऑपरेशन की तैयारी कर रहा था। 8 मई 1999 को कुछ पाकिस्तानी फौजियों और कश्मीरी आतंकियों को कारगिल की चोटी पर देखा गया था जिसके बाद ये युद्ध लड़ा गया। पाकिस्तान का दावा था कि इस लड़ाई में सिर्फ मुजाहिद्दीन शामिल थे, जबकि ISI के पूर्व अधिकारी शाहिद अज़ीज़ ने यह राज़ उजागर किया कि ये लड़ाई पाकिस्तान के नियमित सैनिकों ने भी लड़ी थी।

इस युद्ध को ‘ऑपरेशन विजय’ नाम दिया गया था। ‘ऑपरेशन विजय’ 8 मई से 26 जुलाई तक चला था। इस लड़ाई में भारतीय सेना के करीब 527 जवान शहीद हुए तो करीब 1363 घायल हुए थे। वहीं पाकिस्तान के इस लड़ाई में करीब तीन हजार जवान मारे गए थे। भारतीय सेना के चार जवानों को इस युद्ध में अदम्य साहस के लिए सेना का सर्वोच्च पदक परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। इनमें से दो को मरणोपरांत पदक भी दिया गया था जबकि बाकि दो हमारे बीच आज भी मौजूद हैं।

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