वो इंसान जिसने लाखों को जीना सिखाया…’मिसाइल मैन’ अब्दुल कलाम को देश का नमन ।

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हरियाणा न्यूज़: ‘‘ख़्वाब वो नहीं, जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि ख़्वाब वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देंते।’’- ये शब्द सुनकर हमारे ज़हन में सिर्फ एक इंसान का नाम आता है, जिसने भारत देश की सूरत बदल कर रख दी। वो नाम और कोई नहीं बल्कि इंडिया के ‘मिसाइल मैन’ ए.पी.जे अब्दुल कलाम का है।

आज उनकी चौथी पुण्यतिथि है। ए.पी.जे अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व किसी परिभाषा का मोहताज नहीं है। उनको किसी एक दायरे में सिमित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने अपनी जिंदगी अपने उसूलों पर जी है, वे जो चाहते थे उसे हासिल करके रहते थे। ये कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने न सिर्फ भारत के बल्कि दुनिया के कई नौजवानों को जिंदगी जीना सिखाया है। जिंदगी ने उन्हें जिस भूमिका को निभाने का दायित्व सौंपा, कलाम साहब ने वो सभी भूमिकाएं बखूबी निभाई है। वे देश के राष्ट्रपति रहे, एक महान विचारक रहे, लेखक रहे और वैज्ञानिक भी रहे। हर क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा। कलाम साहब की ज़िंदगी का सार ही यही है- ख्वाब देखिए, ख़्वाब पूरे जरूर होते हैं, चाहे परिस्थितियां कैसी भी रहे।

कलाम के आखिरी पल

आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर पूरा राष्ट्र उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, नितिन गडकरी, जितेंद्र सिंह समेत देश के तमाम बड़े नेता और देशवासी उन्हें याद कर रहे हैं और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। 27 जुलाई 2015 को उनका निधन हुआ था। तब वो शिलांग के आईआईएम में लेक्चर देने के लिए गए हुए थे। लेक्चर देते वक्त उन्हें दिल का दौरा पड़ा। जल्द से जल्द उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और 83 वर्ष की आयु में ए.पी.जे अब्दुल कलाम देश को हमेशा के लिए अलविदा कह गए।

कई पुरस्कारों से किया गया सम्मानित

अब्दुल कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। कलाम देश के केवल तीसरे ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हे भारत के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न दिया गया। उनसे पहले यह सम्मान मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन को दिया गया था।

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