प्यार-मोहब्बत से मनाए जाने वाले बकरीद के त्योहार पर जानिए क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी..

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हरियाणा न्यूज: आज पूरे देश में ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद मनाई जा रही है। रमज़ान के पाक महीने के खत्म होने के 70 दिन बाद ये ईद मनाई जाती है। आपको बता दें कि इसे इस्लाम में बकरीद कुर्बानी का पर्व माना जाता है। इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कहीं ऊंट तो कहीं भेड़ की भी कुर्बानी दी जाती है। लोग हजरत इब्राहिम की कुर्बानी को याद कर एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। इस दिन दावतों के साथ-साथ एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी जाती है।

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने धू-अल-हिज्जा की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है। इस्लाम में गरीबों और मजलूमों का खास ध्यान रखने की परंपरा है। कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। इन तीनों हिस्सों में से एक हिस्सा खुद के लिए और शेष दो हिस्से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दिए जाते हैं। तारीख में ऐसे भी जिक्र हैं कि बकरीद का त्योहार इसलिए भी मनाया जाता है कि जिससे वो महरूम लोग जो साल भर महंगा नॉनवेज खाना नहीं खा पाएं वो भी इसकी लज्जत ले सकें।

बकरा ईद मुसलमानों का दूसरा सबसे प्रमुख त्योहार है। इससे बड़ा और प्रमुख त्योहार ईद या ईद-उल-फित्र होता है जिसमें सेवईं, मिठाइयां और पकवान बनते हैं और एक दूसरे को खिलाया जाता है। लेकिन बकरीद कुर्बानी का त्योहार है इसीलिए इसे बकरीद के नाम से जाना जाता है।

बकरीद का त्योहार मीठी ईद से अलग होता है। ये मीठी ईद के करीबन 2 महीने बाद मनाया जाता है। इसकी शुरूआत भी नमाज के साथ होती है, बस इन दोनों त्योहारों में यही फर्क रहता है कि मीठी ईद में कोई कुर्बानी नहीं होती जबकि बकरीद में किसी बड़े हलाल जानवर को जिबहा किया जाता है।

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