…जब डेयर डेविल बाइक पर सवार होकर निकले CM मनोहर लाल, वायरल हुई तस्वीर

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हरियाणा न्यूज़: भारत सहित दुनिया भर में लाखों भारतीयों ने गुरुवार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। गुरुवार सुबह से ही कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक जश्‍न-ए-आजादी का दौर जारी है। आजादी के इस जश्‍न के बीच एक नेता की जमकर चर्चा हो रही है। यह नेता कोई और नहीं बल्कि हरियाणा के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं।

दरअसल, मुख्‍यमंत्री खट्टर सोनीपत जिले में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में इतने उत्‍साहित हो गए कि वह राज्‍य पुलिस की डेयर डेविल बाइक पर ही बैठ गए। खट्टर ने डेयर डेविल बाइक शो के अंत में एक पुलिस वाले की मोटर साइकिल पर सवारी की। सोशल मीडिया पर खट्टर की यह तस्वीर जमकर वायरल हो रही है। लोग उनकी हिम्मत की सराहना कर रहे हैं।

इस तस्वीर को हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) नवदीप सिंह विर्क ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा रीट्वीट किया गया है।

इस दौरान अपने संबोधन में सीएम खट्टर ने जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को हटाने के फैसले पर कहा, “जिस तरह अपनी बुद्धि और रणकौशल से श्री कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी ने महाभारत के युद्ध में विजय हासिल की थी, उसी तरह प्रधानमंत्री जी एवं गृह मंत्री जी की जोड़ी ने असंभव से दिखने वाले कार्य को सहजता से पूरा किया है। श्रद्धेय श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को सच्ची श्रद्धांजलि अब मिली है।”

सीएम खट्टर ने आगे कहा, “इस बार की आज़ादी का पर्व दोगुनी ख़ुशी लेकर आया है। जम्मू-कश्मीर को धारा 370 और 35A से मुक्ति दिलाकर आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। मैं इनका हरियाणा की जनता की तरफ से अभिनन्दन करता हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “जनभावना का सम्मान करते हुए इस अनुछेद को समाप्त किया गया है , जो पिछले 70 साल से कश्मीर और भारत के जुड़ाव को सफल नही होने दे रहा था। स्वर्गीय सरदार पटेल जी के अधूरे सपने को पूरा करके हमारे केन्द्रीय नेतृत्व ने इस पुरानी पीर को हरने का काम किया है।”

इस दौरान सीएम ने कहा, “हमारी सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी विधवाओं की मासिक पेंशन रु 25,000 की है। युद्ध में शहीद सैनिक परिवार के लिए अनुग्रह राशि को बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। वीरगति को प्राप्त होने वाले शहीदों के परिवारों के आश्रितों को 292 सरकारी नौकरी दी जा चुकी है।”

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