संन्यास के बाद छलका युवराज सिंह का दर्द, बोले- टेस्ट पास करने के बाद भी टीम से किया ड्रॉप

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स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय टीम ने साल 2007 में टी-20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था और फिर साल 2011 में वन-डे वर्ल्ड कप को अरपने नाम किया था। आने वाले समय में जब कभी भी इन दो विश्व कप की बातो होगी तो युवराज सिंह का नाम सबसे उपर लिया जाएगा। क्योंकि युवराज सिंह ने दोनों ही विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया था और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। युवराज सिंह ने हाल ही में क्रिकेट को अलविदा कहा था लेकिन संन्यास लेने के बाद युवारज सिंह ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है और कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह टीम से बाहर हो जाएंगे।

युवराज ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि 8-9 मैचों में सें 2 में ‘मैन ऑफ द मैच’ रहने के बाद मुझे ड्रॉप कर दिया जाएगा। मैं चोटिल हो गया और मुझे बताया गया श्रीलंका सीरीज के लिए तैयार रहें। फिर अचानक यो-यो टेस्ट की बात सामने आ गई, मेरे चयन में यह यू-टर्न था। 36 साल की उम्र में अचानक मुझे वापस जाना पड़ा और यो-यो टेस्ट की तैयारी करनी पड़ी। इसके बाद भी जब मैंने यो-यो टेस्ट को क्लियर किया, तो बताया गया कि मुझे घरेलू क्रिकेट खेलना है। युवराज ने कहा कि उन्हें (टीम प्रबंधन) ऐसा लगा था कि मैं अपनी उम्र के कारण यो-यो टेस्ट क्लियर नहीं कर पाऊंगा और इसके बाद मुझे निकालने में उन्हें आसानी होगी… हां, आप कह सकते हैं कि यह एक बहाना था।

आपको बता दें कि भारतीय टीम में सिक्सर किंग के नाम से मशहूर युवराज सिंह ने इस साल 10 जून को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी। युवराज भारत की दो वर्ल्ड चैम्पियन (2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में वर्ल्ड कप) टीमों का हिस्सा रहे और दोनों ही टूर्नमेंट्स में उन्होंने अपने प्रदर्शन से खास छाप छोड़ी थी।

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