सावधान! कहीं आप भी तो नहीं फंस रहे है Fake News के जाल में..

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#FakeNews

हरियाणा न्यूज: पिछले कुछ सालों से फेक न्यूज का दौर चल रहा है। जिसके तहत किसी भी न्यूज चैनल की छवि को आसानी से धुमिल किया जा सकता है। ऐसा नहीं है कि फेक न्यूज जैसा शब्द सिर्फ पश्चिमी जगत के मीडिया में ही हो रहा होगा। भारत में भी इसका इस्तेमाल खूब तेजी से होता है। दरअसल फेक न्यूज आज के समय में एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। फेक न्यूज को लेकर पहल दुनियाभर में चल रही है लेकिन इसके लिए अभी तक रोक लगाने के पुख्ता इंतजाम नही किए गए है। ऐसी न्यूज सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा फैलाई जाती है।

क्या होता है फेक न्यूज

फेक न्यूज यानि की पत्रकारिता की भाषा में इसे ‘येलो जर्नलिजम’ भी कहते है। इन खबरों के जरिए किसी भी न्यूज संस्थान की छवि और लोगों को आसानी से भड़काने के लिए फेक खबरों का इस्तेमाल किया जाता है। बेक्रिंग झूठी खबरों, बनावटी हेडलाइन या किसी भी न्यूज चैनल का LOGO का इस्तेमाल करके जनता को भडकाने के लिए फेक न्यूज बनाई जाती है।

डिजिटल मीडिया में ज्यादा फेक न्यूज

भारत में कड़े नियम करने की कयावद

सिंगापुर, मलेशिया के साथ-साथ कई देशों में भी फेक न्यूज फैलाए जाने पर कई तरह के कानून बनाए गए है। भारत में भी फेक न्यूज फैलाने वाले दोषी पर कड़ी कार्रवाई की अनुशंशा की गई है। हलांकि फर्जी खबरों के संबंध में जारी गाइडलाइंस को प्रधानमंत्री कार्यालय ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को वापस लेने के लिए कहा है। सूचना प्रसारण मंत्रालय फेक न्यूज फैलाने पर दोषी की मान्यता पहले अस्थाई और बार-बार करने पर स्थायी तौर पर रद्द करने की बात कही थी।

कौन करेगी फेक न्यूज की पहचान

प्रिंट व टेलीविजन मीडिया के लिए दो रेगुलेटरी संस्‍थाएं हैं- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्‍यूज ब्रॉडकास्‍टर्स एसोसिएशन (NBA), यह संस्थाएं तय करेंगी कि खबर फेक है या नहीं। दोनों को यह जांच 15 दिन में पूरी करनी होगी। एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी। दोनों एजेंसियों द्वारा फेक न्‍यूज की पुष्‍टि किए जाने के बाद पहली गलती पर छह माह के लिए मान्‍यता रद्द की जाएगी, दूसरी बार में एक साल के लिए मान्‍यता रद्द हो जाएगी और तीसरी बार में स्‍थायी रूप से आरोपी की मान्‍यता रद्द हो सकती है।

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