सरकारी स्कूल के हाल बदहाल, गंदगी में पढ़ने को मजबूर छात्रों की सुध नहीं ले रहा प्रशासन

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हरियाणा न्यूज: प्रदेश सरकार एक तरफ जहां प्रदेश में स्वच्छता अभियान चला रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूल स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहे हैं। मामला सोनीपत में स्थित कुंडली के प्राइमरी स्कूल का हैं जहां स्वच्छता अभियान के दावों की पोल खोल रहा है और यह स्कूल विद्यार्थियों के लिए आफत बन गया है। बता दें कि स्कूल परिसर में जगह-जगह शिविर का गंदा पानी भर गया है। जिसकी वजह से बच्चों की ना केवल पढ़ाई बाधित हो रही है बल्कि उनका स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। शिविर के गंदे पानी के चलते स्कूल की किचन भी बंद हो चुकी है। वहीं स्कूल के पार्क में भी पानी आने से मच्छर और दूसरे जीव जंतु बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। कई बार प्रशासन को शिकायत के बावजूद भी स्कूल की सुध लेने कोई नहीं आया, जिससे प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है।

वहीं बच्चों के साथ-साथ परिजनों में भी अब अपने बच्चों को स्कूल में भेजने से डर लगने लगा है। अभिभावकों का कहना है कि पिछले कई महीनों से शिविर के गंदे पानी की निकासी स्कूल से नहीं कराई गई है और बच्चों को काफी दिक्कत हो रही है। आलम यह है कि अब बच्चों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।

वहीं अध्यापकों का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग से लेकर शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग हर तरफ बच्चों की समस्या को रख चुकी हैं। अभिभावकों ने बताया कि स्कूल में सीवर का गंदा पानी हाईवे से कई महीने पहले जमा हुआ था। सफाई कराने के लिए सभी विभागों को लिखा जा चुका है, लेकिन किसी ने स्कूल के सुध तक नहीं ली। अब हालात यह हो चुके हैं कि गंदे पानी की वजह से स्कूल में जगह-जगह पानी इक्कठा हो गया है और बच्चे परेशान हैं। वहीं अध्यापकों ने अपने निजी खर्च से स्कूल में जिस पार्क का निर्माण करवाया था, वह भी खराब हो गया है।

बहरहाल अधिकारी भले ही कागजों में स्वच्छता के दावों का दम भर रहें हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिलकुल अलग है। सरकारी स्कूल के छोटे-छोटे बच्चें शासन प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इनके इन बच्चों की भी सुध नहीं लेने वाला कोई नहीं हैं। अधिकारियों की इस लापरवाही की वजह से जहां सरकार की और खुद पीएम के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रहीं है, तो वहीं अधिकारीयों की लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य पर भी भारी पड़ रही है, अगर जल्द अधिकारियों ने समस्या का समाधान नहीं किया, तो यह बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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