नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर वित्त मंत्रालय के पूर्व अधिकारी का दावा- ‘2000 रुपये के नोट की हो रही जमाखोरी, इसे बंद कर देना चाहिए’

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हरियाणा न्यूज़: नोटबंदी की तीसरी वर्षगांठ पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव एस. सी. गर्ग ने कहा कि 2,000 रुपये के नोट को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट की जगह लाए गए 2,000 रुपये के नोट की जमाखोरी की जा रही है और इसे बंद कर देना चाहिए।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले आज ही के दिन 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट को बंद करने की घोषणा की थी। इसका मकसद काले धन पर अंकुश लगाना, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और देश को लेस-कैश अर्थव्यवस्था बनाना था।

भारत में धीमी है डिजिटल भुगतान का विस्तार

समाचार एजेंसी पीटीआई को मुताबिक गर्ग ने एक बयान में कहा, “वित्तीय प्रणाली में अब भी काफी मात्रा में नकदी है। 2,000 रुपये के नोटों की जमाखोरी इसका सबूत है। पूरी दुनिया में डिजिटल भुगतान का विस्तार हो रहा है। भारत में भी ऐसा ही हो रहा है। हालांकि, विस्तार की रफ्तार धीमी है।”

वित्त मंत्रालय से स्थानांतरण के बाद गर्ग ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली थी।गर्ग ने कहा कि मूल्य के आधार पर चलन में मौजूद मुद्रा में 2,000 रुपये के नोट की एक – तिहाई हिस्सेदारी है।

2000 के नोट को की बंद करने की वकालत

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गर्ग ने दो हजार रुपये के नोट को बंद करने या चलन से वापस लेने की वकालत करते हुए कहा, “वास्तव में 2,000 रुपये के नोटों का एक अच्छा-खासा हिस्सा चलन में नहीं है। इनकी जमाखोरी हो रही है। इसलिए मुद्रा के लेनदेन में 2,000 रुपये के नोट ज्यादा नहीं दिखते हैं।”

उन्होंने कहा, “बिना किसी दिक्कत के इन नोटों को बंद किया जा सकता है। इसका एक आसान तरीका है कि इन नोटों को बैंक खातों में जमा कर दिया जाए। इसका उपयोग प्रक्रिया के प्रबंधन में किया जा सकता है।”

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