जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

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हरियाणा न्यूज़: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या केस में सुनाए गए फैसले के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह याचिका जमीयत के उत्तर प्रदेश जनरल सेक्रेटरी मौलाना अशद रशीदी की ओर से दायर की गई है, जो अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकर्ताओं में से एक हैं।

जमीयत की कार्यकारी समिति ने 14 नवंबर को पांच सदस्यों का एक पैनल गठित किया था जिसमें कानूनी विशेषज्ञ और धार्मिक मामलों के विद्वानों को शामिल किया गया था। इस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के नौ नवंबर के फैसले के प्रत्येक पहलु को देखने के लिए किया गया था।

जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की अगुवाई में इस पैनल ने शीर्ष अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिका की संभावनाओं को देखा और सिफारिश की इस मामले में समीक्षा याचिका दायर की जानी चाहिए।

बता दें कि 17 नवंबर को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस बात की घोषणा की थी कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करेगा। उन्होंने फैसले पर कहा था कि यह न तो सबूतों के आधार पर सटीक बैठता है और न ही किसी तर्क के हिसाब से उचित है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ऐतिहासिक फैसला

उल्लेखनीय है कि 70 साल तक चली कानूनी लड़ाई, 40 दिन तक लगातार मैराथन सुनवाई के बाद अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला 9 नवंबर को दिया था। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए एक प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने को भी कहा।

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