अयोध्या मामला: पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को लेकर मुस्लिम पक्ष में दिखी दरार

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हरियाणा न्यूज: अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को लेकर मुस्लिम पक्ष में दरार दिख रही है। जहां सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पहली रिव्यू पिटिशन दाखिल कर दी गई है, वहीं अब तक इस केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड समेत मुस्लिम पक्ष की पैरवी करने वाले वकील राजीव धवन को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने हटा दिया है। उधर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने अभी कुछ दिन बाद रिव्यू याचिका दाखिल करने की बात कही है।

जमीयत के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए वकील राजीव धवन ने कहा, ‘मैं वहां मुस्लिम पक्षकारों के बीच समस्या को हल करने के लिए नहीं खड़ा हुआ था। मैं नहीं चाहता कि वे अलग हों। मैंने उनके लिए पूरी तरह से एक यूनिट के रूप में बहस की। मैं मुस्लिम पक्षकारों को बंटते हुए नहीं देखना चाहता हूं। यह उनके ऊपर है कि वह समस्या का किस तरह हल निकालते हैं।’ धवन ने इस मामले में वकील एजाज मकबूल पर मुस्लिम पक्ष में दरार डालने का आरोप लगाया।

उधर वकील एजाज मकबूल ने कहा कि ‘मुद्दा यह है कि मेरे क्लाइंट यानी की जमीयत रिव्यू पिटिशन दाखिल करना चाहते थे। यह काम राजीव धवन को करना था। वह उपलब्ध नहीं थे, इसलिए मैं पिटिशन में उनका नाम नहीं दे पाया। यह कोई बड़ी बात नहीं है।’

अभी यह भी कहा जा रहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्ष राजीव धवन को अपनी पुनर्विचार याचिका में वकील बना सकते हैं। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक मुस्लिम पक्षकार ने सोमवार को रिव्यू पिटिशन दाखिल की। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद असद रशीदी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को सौंपने और मस्जिद के लिए दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने के फैसले में खामियां हैं। इस बीच मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा है कि इस मामले में एआईएमपीएलबी 9 दिसंबर से पहले पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा।

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