रेवाड़ी: ना पासवर्ड बताया ना बदला ATM कार्ड, फिर भी खातों से निकल गए 2.80 लाख, पढ़िए पूरी खबर

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हरियाणा न्यूज: रेवाडी जिले में लगातार बढ़ते साइबर क्राइम ने पुलिस, बैंकों और बैंक ग्राहकों को दुविधा में डाल दिया है। न पासवर्ड बताया न बदला कार्ड, फिर भी धोखाधड़ी के तीन मामलों में खातों से निकल गए दो लाख अस्सी हज़ार, चौथे के पेटीएम से ट्रांसफर हो गए 11 हजार। जिला रेवाडी में अकेले वर्ष 2019 में ऑनलाइन ठगी के 75 से अधिक मामलों में शातिर बदमाशों ने लोगों को करोड़ों का चूना लगा दिया। लोग परेशान है खाते सुरक्षित कैसे हों, बैंकों और पुलिस के लिए साइबर क्राइम एक चुनौती बन गई है कि आखिर इन शातिर बदमाशों तक कैसे पंहुचा जाए, जो अपने आप मे बहुत बड़ा सवाल है।

केस-1: रेवाड़ी के विजय नगर निवासी और बी एस एफ से सेवानिवृत्त जवान ने बताया कि वह 29 दिसम्बर से 6 जनवरी तक शहर से बाहर गया हुआ था, इसी दौरान शातिर साइबर ठगों ने अलग अलग स्थानों के एटीएम से उनके खाते में सेंध लगाकर एक लाख उड़ा लिए जबकि उनका कार्ड घर पर अलमारी में लॉक था। इन्होंने किसी से अपना पासवर्ड भी सांझा नहीं किया। अब शिकायत के बाद पुलिस और बैंक जल्द जांच करने की बात कह रहे हैं।

केस-2: एटीएम क्लोनिंग की दूसरी वारदात बावल स्थित एक कम्पनी में कार्यरत कर्मचारी के साथ हुई, जिसके खाते से शातिर ठगों ने अलग अलग एटीएम के माध्यम से एक लाख पर हाथ साफ कर दिया, जबकि इनका कार्ड भी घर पर ही था।

केस-3:  धोखाधड़ी की तीसरी वारदात जिले के गांव आलमपुर निवासी बिजेंद्र के साथ हुई, जिनके खाते से शातिर ठगों ने मात्र 10 मिनट के अंतराल में 80 हजार उड़ा दिये, जबकि इनका कार्ड भी इनकी जेब मे ही था।

केस-4: चौथी ठगी की वारदात गांव पालहवास निवासी पंकज के साथ हुई, जिनके पेटीएम से ठगों ने 4 जनवरी को 11 हजार ट्रांसफर कर लिये जिसका पता उन्हें मोबाइल पर आए मैसेज से लगा। बहरहाल पुलिस ने ठगी के चारों मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन मीडिया के सामने अभी भी चुप्पी साधे हुए हैं।

इस संदर्भ में हमने बैंक ऑफ इंडिया के प्रबन्धक से बात की, तो उन्होंने भी माना कि जिले में साइबर क्राइम के मामले बढ़ रहे हैं। लेकिन इन्हें एकदम बंद कर पाना एक चुनौती है, क्योंकि टैक्नोलॉजी फ़ास्ट होने के साथ साथ साइबर क्राइम को अंजाम देने वाले अपराधी भी उतने ही शातिर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम से बचने के लिए लोगों को खुद जागरूक होना पड़ेगा।

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