गुरुग्राम से साइकिल पर बैठाकर अपने पिता को बिहार लेकर पहुंची ‘साइकिल गर्ल’ ज्योति की मदद के लिए बढ़े हाथ, साइक्लिंग फेडरेशन भी ‘मेहरबान’

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हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर 15 साल की एक लड़की ज्योति कुमारी लोगों का ध्यान खींच रही है, क्योंकि उसने अपने पिता को साइकिल के पीछे बैठाकर आठ दिन में गुरुग्राम से बिहार 1200 किलोमीटर का सफर तय किया। इस समय प्रवासी मजदूरों की लॉकडाउन के कारण घर वापसी की कई खबरें देखी जा सकती हैं।

सोशल मीडिया पर खबर वायरस होने के बाद ज्योति को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। अपने बीमार पिता को गुरुग्राम से साइकिल पर बैठाकर दरभंगा तक जाने वाली ज्योति जब मीडिया के मार्फत सुर्खियों में आई तो उसके हौसले की हर तरफ चर्चा हुई। अखिलेश ने ज्योति की उस वायरल तस्वीर के साथ एक ट्वीट किया है जिसमें उसे एक लाख रुपए देने की बात है।

साइक्लिंग फेडरेशन भी ‘मेहरबान’

इसी तरह ज्योति कुमारी की इस खबर ने भारतीय साइकिलिंग महासंघ (सीएफआई) का ध्यान अपनी तरफ खींचा। अब इस लड़की को ट्रायल के लिए बुलाया गया है ताकि वो आईजीआई स्टेडियम में राष्ट्रीय साइकिलिंग अकादमी में ट्रेनिंग कर सके। सीएफआई चेयरमैन ओंकार सिंह ने शुक्रवार को पीटीआई से कहा, “हमने उनसे कल बात की। हम उन्हें जल्द से जल्द बुलाने के बारे में सोच रहे हैं। वह तैयार हैं लेकिन अभी तो वह क्वारंटाइन में हैं।”

सिंह ने कहा कि सीएफआई के लिए कुछ नई बात नहीं है, हम उन्हें अपने सिस्टम में लाना चाहते हैं और उन्हें देखना चाहते हैं। हम उन्हें ट्रायल्स के लिए बुलाना चाहते हैं। जहां कं प्यूटराइज्ड बाइक पर उनका टेस्ट होगा। यहां किसी भी साइकलिस्ट का इसी तरह टेस्ट किया जाता है। यह सही तरह से बताता है कि खिलाड़ी कैसा प्रदर्शन कर सकता है।

सिंह ने कहा, “एक बार जब उन्होंने टेस्ट पास कर लिया तो वह हमारे साथ होंगी। हम उन्हें एकदम से उठा कर नहीं ला रहे हैं। 1200 किलोमीटर साइकिल चलाना आसान नहीं है और इसके लिए उनके अंदर निश्चित तौर पर कुछ खास होगा। अकादमी में हमारे पास जो युवा हैं उनमें से किसी का भी साइकिलिंग का इतिहास नहीं है। उन्हें सिर्फ उनके फिजिकल पैरामीटर पर चुना गया है। इसलिए इसमें कुछ नया नहीं है।”

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि जब लॉकडाउन लागू हुआ तो ज्योति कुमारी हरियाणा के गुरुग्राम में फंसी थीं। उनके पिता ऑटो रिक्शा ड्राइवर हैं, लेकिन चोटिल हो गए थे। इसी बीच लॉकडाउन के कारण उनके पास आय के साधन भी नहीं बचे थे। इसी कारण ज्योति ने गुरुग्राम से अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर दरभंगा के सिंहवाड़ा स्थित अपने गांव सिरहुल्ली लेकर पहुंचीं। ये 1200 किलोमीटर का सफर दुबली पतली सी बच्ची के हौसलों के चलते ही संभव हुआ।

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