विधानसभा उपचुनाव: हमीरपुर सीट पर BJP का कब्जा, दंतेवाड़ा में कांग्रेस और पाला में सत्तारुढ़ LDF की जीत

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हरियाणा न्यूज़: उत्तर प्रदेश में हमीरपुर के सदर विधानसभा के उपचुनाव में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उम्मीदवार युवराज सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रत्याशी को 17,771 मतों से करारी शिकस्त दे दी है। वहीं, केरल में पाला विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ माकपा नीत एलडीएफ विजयी रहा है। चुनाव आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर, केरल के पाला और त्रिपुरा के बधरघाट में उपचुनाव के लिए मतदान कराया गया था।

छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती देवती कर्मा ने शानदार जीत दर्ज की हैं। राष्ट्रीय कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा गया है “दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती देवती कर्मा जी को विजयी होने पर हार्दिक बधाई और समस्त मतदाताओं का आभार। प्रदेश कांग्रेस सरकार क्षेत्र के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और जनभावनाओं का ख्याल रखते हुए कार्य करती रहेगी।”

हमीरपुर में BJP का कब्जा

हमीरपुर उपचुनाव में मायावाती के नेतृत्व वाली बीएसपी के नौशाद अली तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही। कुल 34 चरणों की मतगणना हुई जिसमें बीजेपी ने शुरू से ही बढ़त बनाए रखी। बीजेपी के युवराज सिंह को कुल 74168 वोट मिले। वहीं, सपा के मनोज कुमार प्रजापति को 56397 वोट मिले।

बीजेपी ने विधानसभा उपचुनाव में हमीरपुर सदर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। हमीरपुर सदर से विधायक अशोक सिंह चंदेल की सदस्यता रद्द होने के बाद 23 सितंबर को संपन्न उपचुनाव के मतदान में बीजेपी प्रत्याशी युवराज सिंह ने जीत दर्ज की है।

पाला में LDF की जीत

वहीं, केरल में पाला विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ माकपा नीत एलडीएफ विजयी रहा है। इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस नीत विपक्षी यूडीएफ का कब्जा था। एलडीएफ उम्मीदवार मणि सी कप्पेन ने यूडीएफ के जोस टॉम पुलिक्कुनेल को नजदीकी मुकाबले में हरा दिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता कप्पेन ने केरल कांग्रेस (एम) के नेता पुलिक्कुनेल को 2,943 मतों से हरा दिया।

पाला सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस नीत यूडीएफ का गढ़ रही है। पूर्व वित्त मंत्री एवं केरल कांग्रेस (एम) के नेता केएम मणि के अप्रैल में निधन के चलते यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी। मणि ने पांच दशक तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद यह जीत एलडीएफ के लिए एक बड़ी राहत है। इस उपचुनाव को यूडीएफ और भाजपा नीत राजग के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।

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