अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के दिन देश भर में दिवाली जैसे उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में भगवान राम मंदिर का ‘भूमि पूजन’ करने वाले हैं। इस मौके को प्रकाश पर्व यानी दिवाली की तर्ज पर बनाए जाने की तैयारी चल रही है। राम मंदिर के भूमि पूजन के दिन देश में दिवाली जैसा आयोजन करने की तैयारी है। यह पहल विश्व हिंदू परिषद यानी विहिप ने की है। विहिप ने सूर्यास्त के बाद घरों, मुहल्लों, गांव, बाजार, मठ-मंदिरों और आश्रमों को दीयों से जगमग करने की अपील की है। लेकिन, विहिप ने आयोजन के दौरान दो गज की दूरी और मास्क जरूरी भी बताया है। संगठन ने कहा है कि उल्लास से जुड़े आयोजन शारीरिक दूरी और सरकारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए ही मनाए जाएं।

बता दें कि देश में दिवाली का त्योहार हर साल मनाया जाता है। कहा जाता है कि दिवाली के दिन भगवान रामचंद्र रावण का वध करके और अपना 14 साल का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। इस दिन पूरी अयोध्या में दीप जले थे और भगवान राम की वापसी का जश्न मनाया गया था। अब कहा जा रहा है कि रामलला का एक तरह से यह वनवास पूरा हुआ है और इसलिए पूरे देश में दीप जलाकर उनका स्वागत किया जाए।

विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री मिलिंद परांडे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि कोरोना के वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी लोग, भूमि पूजन के दिन अयोध्या नहीं आ सकते, इसलिए अपने घरों, निकट के मठ-मंदिरों या स्थानीय सार्वजनिक स्थलों पर इस उत्सव को दो गज की दूरी का पालन करते हुए धूमधाम से मनाएं। विहिप महामंत्री ने सूर्यास्त के बाद घरों, मुहल्लों, गांव, बाजार, मठ-मंदिरों, आश्रमों की सजावट कर दीप जलाने की अपील की है।

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के लिए एक कार्ययोजना तैयार की है। भूमि पूजन के दौरान देशभर की पवित्र नदियों का जल और तीर्थों की पावन माटी का उपयोग होगा। श्रीराम जन्म भूमि के मंदिर को सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकात्मता और हिंदुत्व के भाव जागरण का प्रतीक बनाया जाएगा। विहिप के महामंत्री मिलिंद परांडे का मानना है कि राम मंदिर का निर्माण, हिन्दू समाज की सैकड़ों वर्षों की अनवरत तपस्या पूरा होने जैसा है।

उन्होंने कहा है कि पांच अगस्त को सभी संत-महात्मा अपने-अपने मठ-मन्दिरों, आश्रमों में और देश-विदेशों में बसे सभी रामभक्त अपने घरों या निकट के मन्दिरों में सामूहिक बैठककर सुबह साढ़े दस बजे से अपने दो आराध्य देव का भजन-पूजन कीर्तन करें। आरती करें और प्रसाद बांटे। किसी बड़े सभागार, हॉल में टेलिविजन या परदे की व्यवस्था कर अयोध्या में भूमि पूजन के कार्यक्रम को लाइव दिखाएं।

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