‘मेरा पानी मेरी विरासत’ में पलवल जिले का अच्छा प्रदर्शन, धान के बजाय दूसरी फसल की खेती करने का लक्ष्य प्राप्त

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हरियाणा न्यूज: प्रदेश में धान की खेती को छोड़कर फसल विविधीकरण के तहत अन्य फसल उगाने वाले किसानों के प्रोत्साहन के लिए शुरू की गई, महत्वकांशी योजना मेरा पानी मेरी विरासत की रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। जिला बागवानी अधिकारी डॉ अब्दुल रज्जाक ने बताया कि जिला पलवल में वर्ष 2021-22 के लिए 250 एकड़ भूमि में धान की बजाय बागवानी की खेती करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ, जो पूरा कर लिया गया है। साथ ही मेरा पानी मेरी विरासत के तहत ये अभियान लगातार जारी है।

जिला बागवानी अधिकारी डा.अब्दुल रज्जाक ने बताया कि पलवल जिले में बढ़ते हुए धान के क्षेत्र से प्रत्येक वर्ष भू-जल स्तर में गिरावट आ रही है। उन्होंने बताया कि कि धान की खेती सबसे ज्यादा पानी का दोहन मांगती है। ऐसे में प्रदेश सरकार  की तरफ से वैकल्पिक फसल के रूप में मक्का, कपास, बाजरा, दलहन, बागवानी की फसलों और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मेरा पानी मेरी विरासत योजना  की शुरुआत की गई है। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत प्रदेश सरकार ने मक्का, कपास, खरीफ तिलहन, खरीफ दालें, चारा वाली फसलों एवं बागवानी की फसल लगाने पर 7000 रुपये प्रति एकड़ देने का प्रावधान किया है। इस योजना के लाभ पात्र वही किसान होंगे जिनके द्वारा पिछले वर्ष धान की खेती की गई हो।

किसान जगदीश ने बताया कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के अनुसार धान की फसल को छोड़कर बागवानी की खेती शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि धान की खेती करने पर पानी की खपत अधिक होती है जबकि बागवानी के अंर्तगत सब्जियों की खेती करने पर पानी की बचत होती है। उन्होंने बताया कि सब्जियों की खेती ड्रिप सिस्टम से करके पानी को बचाया जा सकता है।

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